अपने और अपनों के जीवन से खिलवाड़ ना करें। अगर बिल से दवा खरीदोगे तो असली दवाई मिलेगी इसकी संभावना 99% है।और अगर बिल नहीं मिल रहा इसका मतलब आपने अपना और अपनों का जीवन किसी के भरोसे छोड़ दिया है । अब उसकी मर्जी है वो आपको असली बिल वाली दवाई दे या ऐसे दिल्ली जैसे बड़े शहरों के नकली दवाई दे।
बिल नहीं मांगना आपका बड़प्पन नहीं अपनो के जीवन से खिलवाड़ है। और हां बिल लेने के लिए आपको कुछ भी अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होता है।आप बिल ले या नहीं ले पैसा उतना ही लेगा दवा दुकानदार।
पुनः आग्रह है दवाई आपकी मर्जी कही से खरीदे पर बिल के साथ खरीदे।
आपके स्वास्थ्य का भरोसेमंद साथी
Zepcure Pharmacy Kanina कॉलेज रोड ,नजदीक आंबेडकर चौक ,कनीना।
Zepcure Pharmacy Ratta
बस स्टैंड राता,अटेली
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सर्दी-जुकाम जैसी बीमारी में भी एंटीबायोटिक लेने का साइड इफेक्ट 💯
एसएमएस में रिसर्च; एंटीबायोटिक 90% तक बेअसर, सर्वाधिक केस स्किन-यूरिन इंफेक्शन के
5 अस्पतालों में 9776 मरीजों पर रिसर्च में हुआ खुलासा...
कुछ एंटीबायोटिक का असर बिलकुल खत्म, कई का विकल्प नहीं है....
स्टैंडर्ड कंपनी की डबल स्ट्रेंथ वाली दवाई दुगनी मात्रा में केवल 97 रुपए MRP के साथ उपलब्ध है वहीं एक निम्न स्तर की दवाई आधी स्ट्रेंथ और आधी मात्रा होकर भी 102 रुपए MRP में उपलब्ध है।
स्टैंडर्ड दवाई देने वाला एक शीशी MRP पर भी बेचेगा तो केवल 20-25 रुपए ही कमाएगा और आधी स्ट्रेंथ आधी मात्रा वाला 102 mrp की शीशी 60 रुपए में बेचकर भी 30-40 रुपए कमाएगा।(हमारा पेशेंट बाहर मेडिकल स्टोर से ये शीशी 60 रुपए में ही खरीद कर लाया था).
यही असल खेल है जो जनता के साथ जेनेरिक दवाई और डिस्काउंट के नाम पर खेला जा रहा है।
सेहत खराब करने वाले पिज्जा बर्गर ब्रांडेड खाने वाली जनता जब अपनी बीमारियों के लिए सस्ती डिस्काउंटेड दवाइयां ढूंढती है तो उसे ऐसे ही ठगा जाता है जिसकी जिम्मेवार वो खुद है।
इसलिए किसी के बहकाव ... View More
स्टैंडर्ड कंपनी की डबल स्ट्रेंथ वाली दवाई दुगनी मात्रा में केवल 97 रुपए MRP के साथ उपलब्ध है वहीं एक निम्न स्तर की दवाई आधी स्ट्रेंथ और आधी मात्रा होकर भी 102 रुपए MRP में उपलब्ध है।
स्टैंडर्ड दवाई देने वाला एक शीशी MRP पर भी बेचेगा तो केवल 20-25 रुपए ही कमाएगा और आधी स्ट्रेंथ आधी मात्रा वाला 102 mrp की शीशी 60 रुपए में बेचकर भी 30-40 रुपए कमाएगा।(हमारा पेशेंट बाहर मेडिकल स्टोर से ये शीशी 60 रुपए में ही खरीद कर लाया था).
यही असल खेल है जो जनता के साथ जेनेरिक दवाई और डिस्काउंट के नाम पर खेला जा रहा है।
सेहत खराब करने वाले पिज्जा बर्गर ब्रांडेड खाने वाली जनता जब अपनी बीमारियों के लिए सस्ती डिस्काउंटेड दवाइयां ढूंढती है तो उसे ऐसे ही ठगा जाता है जिसकी जिम्मेवार वो खुद है।
इसलिए किसी के बहकावे में ना आए।हमेशा अच्छी स्टैंडर्ड ब्रांडेड दवाइयां ही खरीदे भले mrp पे खरीदनी पड़े।
आपको जेनेरिक दवाइयों के फायदे बताने वाला कोई नेता या अफसर खुद जेनेरिक दवाई नहीं खाता।
आप जनता है,आपकी जान सस्ती है।इसलिए सारा ज्ञान आपको ही दिया जाता है। View Less
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर नींद को हल्के में ले लेते हैं। देर रात तक काम करना, तनाव, मोबाइल स्क्रीन पर घंटों बिताना और खराब जीवनशैली के कारण अच्छी नींद से वंचित हो जाते हैं। लेकिन स्वस्थ जीवन का मूल आधार अच्छी नींद है। यह न केवल मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि संपूर्ण जीवनशैली को भी नियंत्रित करती है।
नींद और स्वास्थ्य का गहरा संबंध
नींद केवल आराम नहीं बल्कि शरीर के लिए एक ज़रूरी प्रक्रिया है। यह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है, मस्तिष्क को सक्रिय रखती है और हार्मोन के संतुलन को बनाए रखती है।
यदि कोई नियमित रूप से अच्छी नींद नहीं लेता, तो उसे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:
प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर नींद को हल्के में ले लेते हैं। देर रात तक काम करना, तनाव, मोबाइल स्क्रीन पर घंटों बिताना और खराब जीवनशैली के कारण अच्छी नींद से वंचित हो जाते हैं। लेकिन स्वस्थ जीवन का मूल आधार अच्छी नींद है। यह न केवल मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि संपूर्ण जीवनशैली को भी नियंत्रित करती है।
नींद और स्वास्थ्य का गहरा संबंध
नींद केवल आराम नहीं बल्कि शरीर के लिए एक ज़रूरी प्रक्रिया है। यह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है, मस्तिष्क को सक्रिय रखती है और हार्मोन के संतुलन को बनाए रखती है।
यदि कोई नियमित रूप से अच्छी नींद नहीं लेता, तो उसे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:
प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
मस्तिष्क कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे ध्यान केंद्रित करने और याददाश्त बनाए रखने में कठिनाई होती है।
तनाव और अवसाद बढ़ सकता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि नींद की कमी रक्तचाप और हृदय गति को असंतुलित कर सकती है।
मोटापा और मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि नींद की कमी से भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन प्रभावित होते हैं।
एक वयस्क व्यक्ति के लिए 7–9 घंटे की गहरी और लगातार नींद आवश्यक होती है।
अच्छी नींद के लिए घरेलू उपाय
बहुत से लोग नींद की गोलियों का सहारा लेते हैं, लेकिन यह नशे की लत और साइड इफेक्ट्स का कारण बन सकती हैं। इसके बजाय, प्राकृतिक घरेलू उपाय अपनाकर अच्छी नींद पा सकते हैं।
1. हर्बल चाय का सेवन
कुछ जड़ी-बूटियों की चाय तनाव को कम करके नींद लाने में मदद करती है:
कैमोमाइल चाय: इसमें एपिजेनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो नींद को बढ़ावा देता है।
लैवेंडर चाय: यह तनाव कम करके मानसिक शांति प्रदान करती है।
वलेरियन जड़ की चाय: एक प्राकृतिक नींद लाने वाली औषधि है।
सोने से एक घंटे पहले गर्म हर्बल चाय पीना लाभकारी होता है।
2. अरोमाथेरेपी: सुगंध से नींद का सुधार
कुछ आवश्यक तेलों की खुशबू नींद लाने में सहायक होती है:
लैवेंडर तेल: इसे तकिए पर छिड़कने से गहरी नींद आती है।
सैंडलवुड (चंदन) तेल: यह तनाव कम करके नींद की गुणवत्ता सुधारता है।
यलंग-यलंग तेल: दिमाग को शांत करके नींद लाने में मदद करता है।
रात को सोने से पहले आवश्यक तेल का उपयोग करने से अच्छी नींद आती है।
3. नींद बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ
कुछ खाद्य पदार्थ नींद के लिए फायदेमंद होते हैं:
केला: इसमें मैग्नीशियम होता है, जो मांसपेशियों को आराम देता है।
बादाम: इसमें मेलाटोनिन होता है, जो नींद को नियंत्रित करता है।
गर्म दूध: इसमें ट्रिप्टोफैन होता है, जो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन बढ़ाता है।
कैफीन, शराब और भारी भोजन से बचना चाहिए।
4. सही वातावरण बनाना
नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए कुछ बदलाव जरूरी हैं:
हल्की रोशनी रखें: अंधेरा शरीर में मेलाटोनिन उत्पादन को बढ़ाता है।
नियमित नींद का समय: हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने से नींद बेहतर होती है।
स्क्रीन टाइम कम करें: मोबाइल और लैपटॉप की नीली रोशनी मेलाटोनिन को कम करती है, जिससे नींद प्रभावित होती है।
आरामदायक बिस्तर: सही गद्दे और तकिए से नींद की गुणवत्ता बढ़ती है।
5. श्वास और विश्राम तकनीक
तनावजनित अनिद्रा से बचने के लिए ये उपाय कारगर हो सकते हैं:
गहरी सांस (4-7-8 विधि): चार सेकंड तक सांस लें, सात सेकंड रोकें और आठ सेकंड में छोड़ें—यह तंत्रिका तंत्र को आराम देता है।
मांसपेशियों को धीरे-धीरे आराम देना: पूरे शरीर की मांसपेशियों को धीरे-धीरे आराम देने से तनाव दूर होता है।
योग और ध्यान: मानसिक शांति के लिए रोज ध्यान करने से नींद की गुणवत्ता बढ़ती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर प्राकृतिक उपायों से कोई सुधार नहीं होता, तो अनिद्रा, स्लीप एपनिया या अन्य नींद संबंधी विकार हो सकते हैं। सही उपचार के लिए विशेषज्ञ से सलाह लेना ज़रूरी है।
निष्कर्ष
अच्छी नींद कोई विलासिता नहीं बल्कि आवश्यकता है। घरेलू उपायों को अपनाकर और बेहतर नींद की आदतें विकसित करके हर सुबह तरोताजा महसूस किया जा सकता है। स्लीपिंग पिल्स की बजाय कैमोमाइल चाय, लैवेंडर की सुगंध और गहरी सांस लेने की तकनीक से नींद की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। आज रात से ही अपनी नींद को प्राथमिकता दें और शरीर को प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित होने दें।
यह लेख कैसा लगा? अगर आप किसी हिस्से में सुधार चाहते हैं या कोई विशेष जानकारी जोड़ना चाहते हैं, तो मुझे बताएं! View Less
Insulin आज की दुनिया में डायबिटीज़ (मधुमेह) एक बेहद आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस बीमारी की जड़ में जो सबसे अहम तत्व है – वह इंसुलिन (Insulin) है?
इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है, जिसकी मौजूदगी और कार्यशैली पर हमारा संपूर्ण स्वास्थ्य टिका होता है – खासतौर पर ब्लड शुगर (रक्त में ग्लूकोज़) के स्तर को संतुलित रखने में।
इस लेख में हम आपको बताएँगे:
1. इंसुलिन क्या है?
2. यह शरीर में कैसे काम करता है?
3. इसके अभाव में क्या समस्याएँ हो सकती हैं?
4. और इंसुलिन थैरेपी क्यों ज़रूरी हो सकती है?
🧬 इंसुलिन क्या है?
इंसुलिन एक हार्मोन है जो हमारे अग्न्याशय (Pancreas) की बीटा कोशिकाओं (Beta Cells) द्वारा उत्पन्न होता है।
इसका मुख ... View More
Insulin आज की दुनिया में डायबिटीज़ (मधुमेह) एक बेहद आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस बीमारी की जड़ में जो सबसे अहम तत्व है – वह इंसुलिन (Insulin) है?
इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है, जिसकी मौजूदगी और कार्यशैली पर हमारा संपूर्ण स्वास्थ्य टिका होता है – खासतौर पर ब्लड शुगर (रक्त में ग्लूकोज़) के स्तर को संतुलित रखने में।
इस लेख में हम आपको बताएँगे:
1. इंसुलिन क्या है?
2. यह शरीर में कैसे काम करता है?
3. इसके अभाव में क्या समस्याएँ हो सकती हैं?
4. और इंसुलिन थैरेपी क्यों ज़रूरी हो सकती है?
🧬 इंसुलिन क्या है?
इंसुलिन एक हार्मोन है जो हमारे अग्न्याशय (Pancreas) की बीटा कोशिकाओं (Beta Cells) द्वारा उत्पन्न होता है।
इसका मुख्य कार्य है:
खून में मौजूद शुगर (ग्लूकोज़) को शरीर की कोशिकाओं में पहुँचाना, ताकि वह ऊर्जा में बदल सके।
सीधे शब्दों में कहें तो इंसुलिन शरीर में ईंधन को इस्तेमाल करने की चाबी है।
🍚 शुगर कहाँ से आती है?
हम जो भी खाते हैं – रोटी, चावल, फल, दूध – उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट पचने के बाद ग्लूकोज़ में बदल जाते हैं। यह ग्लूकोज़ खून में पहुँचता है और फिर शरीर की ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुसार कोशिकाओं में भेजा जाता है।
लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में इंसुलिन का होना बेहद जरूरी है। बिना इंसुलिन के, ग्लूकोज़ कोशिकाओं तक पहुँच ही नहीं सकती। वह खून में जमा होती रहती है और यहीं से शुरू होता है मधुमेह का खतरा।
🔄 इंसुलिन कैसे काम करता है? – एक सरल उदाहरण
कल्पना कीजिए कि आपकी कोशिकाएँ एक बंद कमरे की तरह हैं, और ग्लूकोज़ उस कमरे में प्रवेश करना चाहता है। लेकिन दरवाज़ा बंद है।
इंसुलिन ही वह चाबी है जो उस दरवाज़े को खोलती है।
जब इंसुलिन दरवाज़ा खोलता है, तो ग्लूकोज़ अंदर जाकर ऊर्जा में बदल जाता है।
अगर इंसुलिन मौजूद न हो या पर्याप्त मात्रा में न हो, तो दरवाज़ा नहीं खुलता – और ग्लूकोज़ खून में तैरता रहता है।
🛑 इंसुलिन की कमी से क्या होता है?
इंसुलिन की कमी या सही ढंग से कार्य न करने पर व्यक्ति को डायबिटीज़ (Diabetes Mellitus) हो जाती है। इसके दो प्रमुख प्रकार हैं:
1. टाइप-1 डायबिटीज़
यह आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में होती है।
इसमें शरीर बिल्कुल भी इंसुलिन नहीं बनाता।
रोगी को हर दिन इंसुलिन इंजेक्शन की ज़रूरत होती है।
2. टाइप-2 डायबिटीज़
यह आमतौर पर वयस्कों में होती है।
इसमें शरीर या तो कम इंसुलिन बनाता है या उसकी संवेदनशीलता (Insulin Resistance) कम हो जाती है।
इसे खानपान, व्यायाम और दवाइयों से कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, पर कई मामलों में इंसुलिन थैरेपी जरूरी हो जाती है।
🩸 इंसुलिन क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
कार्य विवरण
✅ शुगर को ऊर्जा में बदलना इंसुलिन ग्लूकोज़ को कोशिकाओं तक पहुंचाता है
✅ रक्त में शुगर लेवल को संतुलित रखना अधिक या कम शुगर – दोनों ही जानलेवा हो सकते हैं
✅ फैट और प्रोटीन मेटाबोलिज्म इंसुलिन शरीर की चर्बी और प्रोटीन के पाचन में भी भूमिका निभाता है
✅ कोशिका मरम्मत और विकास इंसुलिन सेल ग्रोथ और रिपेयर में भी अहम
💉 इंसुलिन थेरेपी क्या है?
जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता, तो डॉक्टर इंसुलिन इंजेक्शन या पंप के रूप में इंसुलिन थैरेपी देते हैं।
इंसुलिन के प्रकार:
प्रकार कार्य
Rapid-acting खाना खाते ही असर करता है
Short-acting 30 मिनट में असर शुरू करता है
Intermediate-acting 12-18 घंटे तक असर करता है
Long-acting 24 घंटे या उससे अधिक तक असर करता है
इंसुलिन कैसे दिया जाता है?
इंजेक्शन (सिरिंज या पेन)
इंसुलिन पंप (बॉडी से जुड़े रहते हैं)
भविष्य में – नेज़ल स्प्रे या ओरल इंसुलिन पर रिसर्च जारी
⚠️ इंसुलिन थैरेपी से जुड़ी गलतफहमियाँ
❌ मिथक: इंसुलिन एक बार शुरू कर दिया, तो ज़िंदगी भर लेना पड़ेगा
✅ सच्चाई: यह व्यक्ति की हालत और बीमारी के प्रकार पर निर्भर करता है। कई मामलों में इंसुलिन अस्थायी रूप से दी जाती है।
❌ मिथक: इंसुलिन से वजन बढ़ता है
✅ सच्चाई: सही डोज़ और जीवनशैली के साथ वजन नियंत्रित किया जा सकता है।
❌ मिथक: इंसुलिन एक “आखिरी उपाय” है
✅ सच्चाई: कई बार शुरुआत में ही इंसुलिन देना जरूरी होता है ताकि अंगों को नुकसान से बचाया जा सके।
🍽️ इंसुलिन और खानपान का संबंध
इंसुलिन के साथ सही आहार बहुत जरूरी है। डायबिटिक व्यक्ति को:
कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड जैसे ओट्स, ब्राउन राइस, हरी सब्ज़ियाँ खाना चाहिए
मीठे, तले हुए और प्रोसेस्ड फूड से बचना चाहिए
खाने का समय नियमित होना चाहिए ताकि इंसुलिन और शुगर लेवल में तालमेल बना रहे
🏃 इंसुलिन और व्यायाम
नियमित व्यायाम इंसुलिन की कार्यक्षमता (Insulin Sensitivity) बढ़ाता है, जिससे शरीर कम इंसुलिन में भी बेहतर काम कर पाता है।
30 मिनट का brisk walk या योग, ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में बहुत मददगार है।
🔍 इंसुलिन का भविष्य – नई तकनीकें
स्मार्ट इंसुलिन – जो सिर्फ ज़रूरत होने पर ही एक्टिव होती है
इंसुलिन पैनक्रिया ट्रांसप्लांट
जीन थेरेपी और आर्टिफिशियल पैनक्रियाज़
📣 निष्कर्ष:
❝ इंसुलिन सिर्फ डायबिटीज़ के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण शरीर के मेटाबॉलिज़्म के लिए अनिवार्य है ❞
इसलिए, अगर डॉक्टर इंसुलिन लेने की सलाह दें:
डरें नहीं
शर्माएं नहीं
और खुद को दोषी न समझें
यह आपके जीवन की रक्षा करता है – ठीक वैसे ही जैसे हवा और पानी। View Less
HeartAttack हर साल लाखों लोग अचानक हुए दिल के दौरे (Heart Attack) के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। कई बार लोग इस समस्या के लक्षणों को समय पर पहचान नहीं पाते या उन्हें मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि हकीकत यह है कि दिल के दौरे से पहले शरीर हमें संकेत देता है, जिन्हें अगर समय पर समझ लिया जाए, तो इलाज और बचाव संभव है।
यह रिपोर्ट आपको बताएगी कि हार्ट अटैक के मुख्य लक्षण क्या होते हैं, कैसे पुरुषों और महिलाओं में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, और कब आपको डॉक्टर के पास तुरंत जाना चाहिए।
❤️ हार्ट अटैक क्या है?
दिल का दौरा तब होता है जब हृदय को ऑक्सीजन और पोषण देने वाली धमनी (कोरोनरी आर्टरी) किसी ब्लॉकेज या रुकावट के कारण बाधित हो जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचता है।
कारण:
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HeartAttack हर साल लाखों लोग अचानक हुए दिल के दौरे (Heart Attack) के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। कई बार लोग इस समस्या के लक्षणों को समय पर पहचान नहीं पाते या उन्हें मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि हकीकत यह है कि दिल के दौरे से पहले शरीर हमें संकेत देता है, जिन्हें अगर समय पर समझ लिया जाए, तो इलाज और बचाव संभव है।
यह रिपोर्ट आपको बताएगी कि हार्ट अटैक के मुख्य लक्षण क्या होते हैं, कैसे पुरुषों और महिलाओं में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, और कब आपको डॉक्टर के पास तुरंत जाना चाहिए।
❤️ हार्ट अटैक क्या है?
दिल का दौरा तब होता है जब हृदय को ऑक्सीजन और पोषण देने वाली धमनी (कोरोनरी आर्टरी) किसी ब्लॉकेज या रुकावट के कारण बाधित हो जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचता है।
कारण:
कोरोनरी धमनी में कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाना
धमनियों में ब्लड क्लॉट
उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान, तनाव, आदि
🚨 प्रमुख लक्षण जो नजरअंदाज नहीं करने चाहिए:
1. सीने में दबाव या दर्द (Chest Pain / Discomfort)
यह सबसे सामान्य लक्षण होता है।
व्यक्ति को ऐसा महसूस हो सकता है जैसे सीने पर कोई भारी बोझ रख दिया गया हो या जलन हो रही हो।
दर्द कई बार बाएं कंधे, बांह, जबड़े या पीठ तक फैल सकता है।
⚠️ नोट: यह दर्द लगातार 5 मिनट से ज्यादा भी रह सकता है या रुक-रुक कर हो सकता है।
2. सांस लेने में तकलीफ (Shortness of Breath)
हल्की गतिविधि पर भी सांस फूलना
चढ़ाई या सीढ़ियाँ चढ़ते वक्त सांस उखड़ना
सोते समय सांस लेने में कठिनाई
यह लक्षण खासकर महिलाओं और बुजुर्गों में अधिक देखने को मिलता है।
3. पसीना आना (Cold Sweat)
बिना किसी गर्मी या मेहनत के पसीना आना
ठंडी या चिपचिपी त्वचा होना
घबराहट के साथ पसीना निकलना
यह लक्षण भी अकसर अनदेखा किया जाता है, लेकिन यह हार्ट अटैक का चेतावनी संकेत हो सकता है।
4. मतली और चक्कर आना (Nausea and Dizziness)
अचानक उल्टी जैसा मन होना
सिर घूमना या बेहोशी जैसा महसूस होना
चलने या खड़े रहने में असहजता
यह लक्षण महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक देखे जाते हैं।
5. थकान और कमजोरी (Extreme Fatigue)
रोज़मर्रा के काम करते हुए भी अत्यधिक थकान महसूस होना
बिना कारण लंबे समय तक शरीर भारी लगना
लगातार सुस्ती बनी रहना
यदि थकान सामान्य से हटकर हो, तो यह दिल की मांसपेशियों की कमजोर हो रही कार्यक्षमता का संकेत हो सकता है।
6. अन्य संकेत जो अनदेखा न करें:
लक्षण विवरण
जबड़े में दर्द विशेषकर बाईं ओर
बांह या कंधे में खिंचाव खासकर बाएं हाथ में दर्द फैलता है
गर्भवती महिलाओं में पेट दर्द या अपच जैसा अहसास यह भी एक छुपा लक्षण हो सकता है
नींद में खलल रात में बार-बार जागना, बेचैनी महसूस होना
👩⚕️ महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अलग क्यों होते हैं?
महिलाओं में लक्षण कम स्पष्ट हो सकते हैं। अकसर वे सीने के दर्द की शिकायत नहीं करतीं, लेकिन निम्नलिखित लक्षण महसूस करती हैं:
अत्यधिक थकान
मतली या उल्टी
शरीर में अकड़न या दर्द
चिंता और घबराहट
इसलिए महिलाएं अगर ऐसे लक्षण महसूस करें, तो इसे “सिर्फ कमजोरी” समझकर टालें नहीं।
📞 कब डॉक्टर के पास जाएं?
यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो और वह 5 मिनट से अधिक बना रहे:
तुरंत एम्बुलेंस (108) बुलाएं
व्यक्ति को आरामदायक स्थिति में बिठाएं
कसावट वाले कपड़े ढीले करें
अगर व्यक्ति होश में है और एलर्जी नहीं है, तो एक एस्पिरिन चबाने के लिए दें (डॉक्टर से पूछकर)
🩺 प्राथमिक जांच और पहचान
हार्ट अटैक की पुष्टि के लिए डॉक्टर निम्नलिखित जांच कर सकते हैं:
ईसीजी (ECG): दिल की धड़कन की इलेक्ट्रिकल गतिविधि जांचता है
ब्लड टेस्ट (Troponin Test): हृदय में क्षति के संकेत देता है
ईकोकार्डियोग्राफी: हृदय की पंपिंग क्षमता का मूल्यांकन
एंजियोग्राफी: ब्लॉकेज की स्थिति जानने के लिए
🔒 कैसे बचें दिल के दौरे से?
✅ जीवनशैली में बदलाव करें:
रोज़ाना 30 मिनट तेज़ चलना या व्यायाम करें
धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएँ
वसा और नमक कम करें
फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज और हेल्दी फैट खाएं
तनाव कम करें – मेडिटेशन या योग का सहारा लें
नियमित जांच कराते रहें – ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल
📌 40 की उम्र के बाद खास ध्यान दें:
परिवार में किसी को दिल की बीमारी हो तो और सतर्क रहें
शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीजों को लक्षण जल्दी उभर सकते हैं
महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद जोखिम बढ़ जाता है
🧠 कुछ मिथक जो तोड़ना ज़रूरी है:
मिथक सच्चाई
“सीने में दर्द नहीं है, तो हार्ट अटैक नहीं हो सकता” कई बार बिना सीने के दर्द के भी अटैक हो सकता है
“मैं फिट हूं, मुझे अटैक नहीं होगा” अटैक कभी भी, किसी को भी हो सकता है – फिट दिखने वाले भी इससे अछूते नहीं
“जवान उम्र में हार्ट अटैक नहीं होता” अब 30 से 40 की उम्र में भी हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं
📣 निष्कर्ष: सावधानी में ही सुरक्षा है
दिल के दौरे के लक्षणों को समझना और समय पर इलाज कराना जीवन रक्षक साबित हो सकता है। याद रखें –
❝ हर सेकंड कीमती है। लक्षणों को नजरअंदाज मत कीजिए। ❞
समय रहते सतर्कता, सही खानपान, व्यायाम और नियमित जांच से हम न सिर्फ हार्ट अटैक से बच सकते हैं बल्कि जीवन को भी लंबा, स्वस्थ और सुरक्षित बना सकते हैं। View Less
LowBP आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में लोग अक्सर उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) के बारे में बात करते हैं, लेकिन निम्न रक्तचाप (लो बीपी) भी एक गंभीर समस्या बनकर उभर रही है। अचानक बीपी लो होना न केवल व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करता है, बल्कि कभी-कभी यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि बीपी अचानक क्यों गिरता है, इसके लक्षण क्या होते हैं और किस प्रकार हम प्राकृतिक उपायों से इसे नियंत्रित कर सकते हैं।
1. बीपी लो क्या है?
जब रक्तचाप सामान्य से कम हो जाता है, यानी 90/60 mmHg से नीचे चला जाता है, तो उसे लो बीपी कहा जाता है। इसका मतलब है कि हृदय द्वारा पंप किया गया रक्त शरीर के अंगों तक सही मात्रा में नहीं पहुंच पा रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से मस्तिष्क, गुर्दे और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों को ... View More
LowBP आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में लोग अक्सर उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) के बारे में बात करते हैं, लेकिन निम्न रक्तचाप (लो बीपी) भी एक गंभीर समस्या बनकर उभर रही है। अचानक बीपी लो होना न केवल व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करता है, बल्कि कभी-कभी यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि बीपी अचानक क्यों गिरता है, इसके लक्षण क्या होते हैं और किस प्रकार हम प्राकृतिक उपायों से इसे नियंत्रित कर सकते हैं।
1. बीपी लो क्या है?
जब रक्तचाप सामान्य से कम हो जाता है, यानी 90/60 mmHg से नीचे चला जाता है, तो उसे लो बीपी कहा जाता है। इसका मतलब है कि हृदय द्वारा पंप किया गया रक्त शरीर के अंगों तक सही मात्रा में नहीं पहुंच पा रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से मस्तिष्क, गुर्दे और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है।
2. अचानक बीपी लो होने के कारण
डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण): शरीर में पानी की कमी से रक्त की मात्रा कम हो जाती है।
भोजन में पोषक तत्वों की कमी: खासकर विटामिन B12 और फोलेट की कमी।
दवाओं का प्रभाव: कुछ दवाएँ जैसे डाइयूरेटिक, हृदय की दवाएँ आदि।
लंबे समय तक खड़ा रहना: खून पैरों में जमा हो जाता है जिससे बीपी गिर सकता है।
इन्फेक्शन या एलर्जी: सेप्सिस या शॉक जैसी स्थिति में भी बीपी गिर सकता है।
तनाव या भावनात्मक आघात: अचानक मानसिक आघात से भी रक्तचाप गिर सकता है।
3. लो बीपी के लक्षण: क्या पहचानें?
अचानक चक्कर आना
धुंधली दृष्टि
थकावट या कमजोरी महसूस होना
मिचली या मतली
त्वचा का ठंडा और पसीने से भीगा होना
तेज़ या अनियमित धड़कन
बेहोशी या मूर्छा
यदि ये लक्षण लगातार बने रहें या बार-बार लौटें, तो यह चेतावनी है कि तत्काल कदम उठाना चाहिए।
4. तुरंत क्या करें: प्राथमिक उपचार
जब किसी व्यक्ति का बीपी अचानक गिर जाए, तो आप निम्न प्राथमिक उपचार आजमा सकते हैं:
व्यक्ति को लेटा दें और पैर ऊपर उठाएं: इससे मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह बढ़ेगा।
नमक और पानी का सेवन कराएं: एक गिलास पानी में थोड़ा नमक डालकर पिलाएं।
मीठा कुछ दें: जैसे कि ग्लूकोज़, शहद या मिठाई।
ताजे फल का रस दें: खासकर अनार या नारियल पानी।
धीरे-धीरे उठाएं: बीपी गिरने के बाद अचानक उठना और चलना खतरनाक हो सकता है।
5. प्राकृतिक और घरेलू उपाय: आयुर्वेद की शक्ति
1. तुलसी के पत्ते:
रोज़ सुबह 5-6 तुलसी के पत्ते चबाने से रक्तचाप संतुलित रहता है। तुलसी में पोटेशियम, मैग्नीशियम और विटामिन C होते हैं।
2. अदरक और शहद:
एक चम्मच अदरक का रस और शहद मिलाकर लेने से रक्त संचार सुधरता है। यह हृदय की गति को नियंत्रित करता है।
3. नमक-नींबू पानी:
एक गिलास गुनगुने पानी में चुटकी भर नमक और आधा नींबू मिलाकर पीने से BP जल्दी सामान्य हो सकता है।
4. अनार का रस:
अनार में आयरन की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर में ऑक्सीजन के संचार को बेहतर बनाता है।
5. गिलोय का सेवन:
गिलोय रक्तसंचार को नियंत्रित करता है और शरीर को ताकत देता है। यह इम्युनिटी भी बढ़ाता है।
6. खानपान में बदलाव: लो बीपी को कहें बाय-बाय
छोटे-छोटे भोजन लें: दिनभर में कई बार हल्का भोजन करने से BP स्थिर रहता है।
नमक की मात्रा बढ़ाएं: लेकिन उच्च रक्तचाप न होने पर ही।
आयरन और विटामिन युक्त आहार: पालक, बीट, अनार, किशमिश, दूध आदि।
कैफीन युक्त पेय: जैसे चाय या कॉफी कभी-कभार बीपी बढ़ाने में सहायक होते हैं।
7. जीवनशैली में सुधार
योग और प्राणायाम: विशेष रूप से अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका जैसे प्राणायाम रक्तचाप को नियंत्रित रखते हैं।
पर्याप्त नींद: 7-8 घंटे की नींद आवश्यक है।
तनाव कम करें: ध्यान और मेडिटेशन का सहारा लें।
अत्यधिक गर्मी या थकान से बचें: शरीर में पानी की कमी और थकावट से बीपी गिर सकता है।
8. कब चिकित्सक से संपर्क करें?
बार-बार चक्कर आना या मूर्छा आना
लंबे समय तक बीपी 90/60 से कम रहना
कोई अन्य बीमारी के साथ लो बीपी होना (जैसे डायबिटीज, हृदय रोग)
अचानक बेहोशी या सांस लेने में तकलीफ
इन स्थितियों में डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है। कभी-कभी बीपी गिरना किसी गंभीर रोग का संकेत हो सकता है।
निष्कर्ष: सजगता ही सुरक्षा है
अचानक बीपी लो होना शरीर का एक संकेत है कि कुछ ठीक नहीं है। समय रहते इस पर ध्यान देकर, आयुर्वेद और घरेलू उपायों को अपनाकर और जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाकर हम इस समस्या को काबू में रख सकते हैं। साथ ही, सतर्कता और प्राथमिक उपचार की जानकारी जीवन रक्षक भी साबित हो सकती है। याद रखें, बीपी चाहे लो हो या हाई, संतुलन ही स्वास्थ्य की कुंजी है। View Less
IIT इंदौर और ICMR के साझा अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी।
IIT इंदौर द्वारा किए गए इस रिसर्च में 3,100 से ज़्यादा कोविड-19 मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया — खासतौर पर पहली और दूसरी लहर के दौरान संक्रमित लोगों का।
इसमें पाया गया कि डेल्टा वैरिएंट ने शरीर के बायोकेमिकल संतुलन पर सबसे गंभीर असर डाला, जिससे कैटेकोलामीन (Catecholamine) और थायरॉइड हार्मोन में असंतुलन देखने को मिला।
क्या पाया गया?
इंफ्लेमेशन मार्कर्स (CRP, फेरिटिन) बढ़े हुए पाए गए
ब्लड क्लॉटिंग में तेजी (D-dimer का स्तर अधिक)
किडनी फंक्शन पर असर (यूरिया, क्रिएटिनिन में बदलाव)
ब्लड सेल काउंट्स में असामान्यता
हार्मोनल बदलाव से साइलेंट हार्ट फेल्योर और थायरॉइड से जुड़ी समस्या ... View More
IIT इंदौर और ICMR के साझा अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी।
IIT इंदौर द्वारा किए गए इस रिसर्च में 3,100 से ज़्यादा कोविड-19 मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया — खासतौर पर पहली और दूसरी लहर के दौरान संक्रमित लोगों का।
इसमें पाया गया कि डेल्टा वैरिएंट ने शरीर के बायोकेमिकल संतुलन पर सबसे गंभीर असर डाला, जिससे कैटेकोलामीन (Catecholamine) और थायरॉइड हार्मोन में असंतुलन देखने को मिला।
क्या पाया गया?
इंफ्लेमेशन मार्कर्स (CRP, फेरिटिन) बढ़े हुए पाए गए
ब्लड क्लॉटिंग में तेजी (D-dimer का स्तर अधिक)
किडनी फंक्शन पर असर (यूरिया, क्रिएटिनिन में बदलाव)
ब्लड सेल काउंट्स में असामान्यता
हार्मोनल बदलाव से साइलेंट हार्ट फेल्योर और थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं की संभावना जताई गई
इस रिसर्च में मशीन लर्निंग का उपयोग कर कुछ ऐसे संकेत पहचाने गए जो आगे चलकर हार्ट और थायरॉइड हेल्थ को प्रभावित कर सकते हैं।
ध्यान रखें:
यह एक रिसर्च स्टडी है, न कि व्यक्तिगत डायग्नोसिस। हर व्यक्ति पर इसके प्रभाव अलग हो सकते हैं। अगर आपको कोविड के बाद थकान, सीने में हल्का दर्द या हार्मोनल असंतुलन जैसे लक्षण महसूस हों, तो विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें। View Less
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अपने और अपनों के जीवन से खिलवाड़ ना करें। अगर बिल से दवा खरीदोगे तो असली दवाई मिलेगी इसकी संभावना 99% है।और अगर बिल नहीं मिल रहा इसका मतलब आपने अपना और अपनों का जीवन किसी के भरोसे छोड़ दिया है । अब उसकी मर्जी है वो आपको असली बिल वाली दवाई दे या ऐसे दिल्ली जैसे बड़े शहरों के नकली दवाई दे।
बिल नहीं मांगना आपका बड़प्पन नहीं अपनो के जीवन से खिलवाड़ है। और हां बिल लेने के लिए आपको कुछ भी अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होता है।आप बिल ले या नहीं ले पैसा उतना ही लेगा दवा दुकानदार।
पुनः आग्रह है दवाई आपकी मर्जी कही से खरीदे पर बिल के साथ खरीदे।
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Zepcure Pharmacy Kanina कॉलेज रोड ,नजदीक आंबेडकर चौक ,कनीना।
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अपने और अपनों के जीवन से खिलवाड़ ना करें। अगर बिल से दवा खरीदोगे तो असली दवाई मिलेगी इसकी संभावना 99% है।और अगर बिल नहीं मिल रहा इसका मतलब आपने अपना और अपनों का जीवन किसी के भरोसे छोड़ दिया है । अब उसकी मर्जी है वो आपको असली बिल वाली दवाई दे या ऐसे दिल्ली जैसे बड़े शहरों के नकली दवाई दे।
बिल नहीं मांगना आपका बड़प्पन नहीं अपनो के जीवन से खिलवाड़ है। और हां बिल लेने के लिए आपको कुछ भी अतिरिक्त भुगतान नहीं करना होता है।आप बिल ले या नहीं ले पैसा उतना ही लेगा दवा दुकानदार।
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सर्दी-जुकाम जैसी बीमारी में भी एंटीबायोटिक लेने का साइड इफेक्ट 💯
एसएमएस में रिसर्च; एंटीबायोटिक 90% तक बेअसर, सर्वाधिक केस स्किन-यूरिन इंफेक्शन के
5 अस्पतालों में 9776 मरीजों पर रिसर्च में हुआ खुलासा...
कुछ एंटीबायोटिक का असर बिलकुल खत्म, कई का विकल्प नहीं है....
स्टैंडर्ड कंपनी की डबल स्ट्रेंथ वाली दवाई दुगनी मात्रा में केवल 97 रुपए MRP के साथ उपलब्ध है वहीं एक निम्न स्तर की दवाई आधी स्ट्रेंथ और आधी मात्रा होकर भी 102 रुपए MRP में उपलब्ध है।
स्टैंडर्ड दवाई देने वाला एक शीशी MRP पर भी बेचेगा तो केवल 20-25 रुपए ही कमाएगा और आधी स्ट्रेंथ आधी मात्रा वाला 102 mrp की शीशी 60 रुपए में बेचकर भी 30-40 रुपए कमाएगा।(हमारा पेशेंट बाहर मेडिकल स्टोर से ये शीशी 60 रुपए में ही खरीद कर लाया था).
यही असल खेल है जो जनता के साथ जेनेरिक दवाई और डिस्काउंट के नाम पर खेला जा रहा है।
सेहत खराब करने वाले पिज्जा बर्गर ब्रांडेड खाने वाली जनता जब अपनी बीमारियों के लिए सस्ती डिस्काउंटेड दवाइयां ढूंढती है तो उसे ऐसे ही ठगा जाता है जिसकी जिम्मेवार वो खुद है।
इसलिए किसी के बहकाव ... View More
स्टैंडर्ड कंपनी की डबल स्ट्रेंथ वाली दवाई दुगनी मात्रा में केवल 97 रुपए MRP के साथ उपलब्ध है वहीं एक निम्न स्तर की दवाई आधी स्ट्रेंथ और आधी मात्रा होकर भी 102 रुपए MRP में उपलब्ध है।
स्टैंडर्ड दवाई देने वाला एक शीशी MRP पर भी बेचेगा तो केवल 20-25 रुपए ही कमाएगा और आधी स्ट्रेंथ आधी मात्रा वाला 102 mrp की शीशी 60 रुपए में बेचकर भी 30-40 रुपए कमाएगा।(हमारा पेशेंट बाहर मेडिकल स्टोर से ये शीशी 60 रुपए में ही खरीद कर लाया था).
यही असल खेल है जो जनता के साथ जेनेरिक दवाई और डिस्काउंट के नाम पर खेला जा रहा है।
सेहत खराब करने वाले पिज्जा बर्गर ब्रांडेड खाने वाली जनता जब अपनी बीमारियों के लिए सस्ती डिस्काउंटेड दवाइयां ढूंढती है तो उसे ऐसे ही ठगा जाता है जिसकी जिम्मेवार वो खुद है।
इसलिए किसी के बहकावे में ना आए।हमेशा अच्छी स्टैंडर्ड ब्रांडेड दवाइयां ही खरीदे भले mrp पे खरीदनी पड़े।
आपको जेनेरिक दवाइयों के फायदे बताने वाला कोई नेता या अफसर खुद जेनेरिक दवाई नहीं खाता।
आप जनता है,आपकी जान सस्ती है।इसलिए सारा ज्ञान आपको ही दिया जाता है। View Less
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर नींद को हल्के में ले लेते हैं। देर रात तक काम करना, तनाव, मोबाइल स्क्रीन पर घंटों बिताना और खराब जीवनशैली के कारण अच्छी नींद से वंचित हो जाते हैं। लेकिन स्वस्थ जीवन का मूल आधार अच्छी नींद है। यह न केवल मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि संपूर्ण जीवनशैली को भी नियंत्रित करती है।
नींद और स्वास्थ्य का गहरा संबंध
नींद केवल आराम नहीं बल्कि शरीर के लिए एक ज़रूरी प्रक्रिया है। यह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है, मस्तिष्क को सक्रिय रखती है और हार्मोन के संतुलन को बनाए रखती है।
यदि कोई नियमित रूप से अच्छी नींद नहीं लेता, तो उसे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:
प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर नींद को हल्के में ले लेते हैं। देर रात तक काम करना, तनाव, मोबाइल स्क्रीन पर घंटों बिताना और खराब जीवनशैली के कारण अच्छी नींद से वंचित हो जाते हैं। लेकिन स्वस्थ जीवन का मूल आधार अच्छी नींद है। यह न केवल मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि संपूर्ण जीवनशैली को भी नियंत्रित करती है।
नींद और स्वास्थ्य का गहरा संबंध
नींद केवल आराम नहीं बल्कि शरीर के लिए एक ज़रूरी प्रक्रिया है। यह हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है, मस्तिष्क को सक्रिय रखती है और हार्मोन के संतुलन को बनाए रखती है।
यदि कोई नियमित रूप से अच्छी नींद नहीं लेता, तो उसे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:
प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
मस्तिष्क कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे ध्यान केंद्रित करने और याददाश्त बनाए रखने में कठिनाई होती है।
तनाव और अवसाद बढ़ सकता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि नींद की कमी रक्तचाप और हृदय गति को असंतुलित कर सकती है।
मोटापा और मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि नींद की कमी से भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन प्रभावित होते हैं।
एक वयस्क व्यक्ति के लिए 7–9 घंटे की गहरी और लगातार नींद आवश्यक होती है।
अच्छी नींद के लिए घरेलू उपाय
बहुत से लोग नींद की गोलियों का सहारा लेते हैं, लेकिन यह नशे की लत और साइड इफेक्ट्स का कारण बन सकती हैं। इसके बजाय, प्राकृतिक घरेलू उपाय अपनाकर अच्छी नींद पा सकते हैं।
1. हर्बल चाय का सेवन
कुछ जड़ी-बूटियों की चाय तनाव को कम करके नींद लाने में मदद करती है:
कैमोमाइल चाय: इसमें एपिजेनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो नींद को बढ़ावा देता है।
लैवेंडर चाय: यह तनाव कम करके मानसिक शांति प्रदान करती है।
वलेरियन जड़ की चाय: एक प्राकृतिक नींद लाने वाली औषधि है।
सोने से एक घंटे पहले गर्म हर्बल चाय पीना लाभकारी होता है।
2. अरोमाथेरेपी: सुगंध से नींद का सुधार
कुछ आवश्यक तेलों की खुशबू नींद लाने में सहायक होती है:
लैवेंडर तेल: इसे तकिए पर छिड़कने से गहरी नींद आती है।
सैंडलवुड (चंदन) तेल: यह तनाव कम करके नींद की गुणवत्ता सुधारता है।
यलंग-यलंग तेल: दिमाग को शांत करके नींद लाने में मदद करता है।
रात को सोने से पहले आवश्यक तेल का उपयोग करने से अच्छी नींद आती है।
3. नींद बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ
कुछ खाद्य पदार्थ नींद के लिए फायदेमंद होते हैं:
केला: इसमें मैग्नीशियम होता है, जो मांसपेशियों को आराम देता है।
बादाम: इसमें मेलाटोनिन होता है, जो नींद को नियंत्रित करता है।
गर्म दूध: इसमें ट्रिप्टोफैन होता है, जो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन बढ़ाता है।
कैफीन, शराब और भारी भोजन से बचना चाहिए।
4. सही वातावरण बनाना
नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए कुछ बदलाव जरूरी हैं:
हल्की रोशनी रखें: अंधेरा शरीर में मेलाटोनिन उत्पादन को बढ़ाता है।
नियमित नींद का समय: हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने से नींद बेहतर होती है।
स्क्रीन टाइम कम करें: मोबाइल और लैपटॉप की नीली रोशनी मेलाटोनिन को कम करती है, जिससे नींद प्रभावित होती है।
आरामदायक बिस्तर: सही गद्दे और तकिए से नींद की गुणवत्ता बढ़ती है।
5. श्वास और विश्राम तकनीक
तनावजनित अनिद्रा से बचने के लिए ये उपाय कारगर हो सकते हैं:
गहरी सांस (4-7-8 विधि): चार सेकंड तक सांस लें, सात सेकंड रोकें और आठ सेकंड में छोड़ें—यह तंत्रिका तंत्र को आराम देता है।
मांसपेशियों को धीरे-धीरे आराम देना: पूरे शरीर की मांसपेशियों को धीरे-धीरे आराम देने से तनाव दूर होता है।
योग और ध्यान: मानसिक शांति के लिए रोज ध्यान करने से नींद की गुणवत्ता बढ़ती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर प्राकृतिक उपायों से कोई सुधार नहीं होता, तो अनिद्रा, स्लीप एपनिया या अन्य नींद संबंधी विकार हो सकते हैं। सही उपचार के लिए विशेषज्ञ से सलाह लेना ज़रूरी है।
निष्कर्ष
अच्छी नींद कोई विलासिता नहीं बल्कि आवश्यकता है। घरेलू उपायों को अपनाकर और बेहतर नींद की आदतें विकसित करके हर सुबह तरोताजा महसूस किया जा सकता है। स्लीपिंग पिल्स की बजाय कैमोमाइल चाय, लैवेंडर की सुगंध और गहरी सांस लेने की तकनीक से नींद की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। आज रात से ही अपनी नींद को प्राथमिकता दें और शरीर को प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित होने दें।
यह लेख कैसा लगा? अगर आप किसी हिस्से में सुधार चाहते हैं या कोई विशेष जानकारी जोड़ना चाहते हैं, तो मुझे बताएं! View Less
Insulin आज की दुनिया में डायबिटीज़ (मधुमेह) एक बेहद आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस बीमारी की जड़ में जो सबसे अहम तत्व है – वह इंसुलिन (Insulin) है?
इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है, जिसकी मौजूदगी और कार्यशैली पर हमारा संपूर्ण स्वास्थ्य टिका होता है – खासतौर पर ब्लड शुगर (रक्त में ग्लूकोज़) के स्तर को संतुलित रखने में।
इस लेख में हम आपको बताएँगे:
1. इंसुलिन क्या है?
2. यह शरीर में कैसे काम करता है?
3. इसके अभाव में क्या समस्याएँ हो सकती हैं?
4. और इंसुलिन थैरेपी क्यों ज़रूरी हो सकती है?
🧬 इंसुलिन क्या है?
इंसुलिन एक हार्मोन है जो हमारे अग्न्याशय (Pancreas) की बीटा कोशिकाओं (Beta Cells) द्वारा उत्पन्न होता है।
इसका मुख ... View More
Insulin आज की दुनिया में डायबिटीज़ (मधुमेह) एक बेहद आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस बीमारी की जड़ में जो सबसे अहम तत्व है – वह इंसुलिन (Insulin) है?
इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है, जिसकी मौजूदगी और कार्यशैली पर हमारा संपूर्ण स्वास्थ्य टिका होता है – खासतौर पर ब्लड शुगर (रक्त में ग्लूकोज़) के स्तर को संतुलित रखने में।
इस लेख में हम आपको बताएँगे:
1. इंसुलिन क्या है?
2. यह शरीर में कैसे काम करता है?
3. इसके अभाव में क्या समस्याएँ हो सकती हैं?
4. और इंसुलिन थैरेपी क्यों ज़रूरी हो सकती है?
🧬 इंसुलिन क्या है?
इंसुलिन एक हार्मोन है जो हमारे अग्न्याशय (Pancreas) की बीटा कोशिकाओं (Beta Cells) द्वारा उत्पन्न होता है।
इसका मुख्य कार्य है:
खून में मौजूद शुगर (ग्लूकोज़) को शरीर की कोशिकाओं में पहुँचाना, ताकि वह ऊर्जा में बदल सके।
सीधे शब्दों में कहें तो इंसुलिन शरीर में ईंधन को इस्तेमाल करने की चाबी है।
🍚 शुगर कहाँ से आती है?
हम जो भी खाते हैं – रोटी, चावल, फल, दूध – उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट पचने के बाद ग्लूकोज़ में बदल जाते हैं। यह ग्लूकोज़ खून में पहुँचता है और फिर शरीर की ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुसार कोशिकाओं में भेजा जाता है।
लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में इंसुलिन का होना बेहद जरूरी है। बिना इंसुलिन के, ग्लूकोज़ कोशिकाओं तक पहुँच ही नहीं सकती। वह खून में जमा होती रहती है और यहीं से शुरू होता है मधुमेह का खतरा।
🔄 इंसुलिन कैसे काम करता है? – एक सरल उदाहरण
कल्पना कीजिए कि आपकी कोशिकाएँ एक बंद कमरे की तरह हैं, और ग्लूकोज़ उस कमरे में प्रवेश करना चाहता है। लेकिन दरवाज़ा बंद है।
इंसुलिन ही वह चाबी है जो उस दरवाज़े को खोलती है।
जब इंसुलिन दरवाज़ा खोलता है, तो ग्लूकोज़ अंदर जाकर ऊर्जा में बदल जाता है।
अगर इंसुलिन मौजूद न हो या पर्याप्त मात्रा में न हो, तो दरवाज़ा नहीं खुलता – और ग्लूकोज़ खून में तैरता रहता है।
🛑 इंसुलिन की कमी से क्या होता है?
इंसुलिन की कमी या सही ढंग से कार्य न करने पर व्यक्ति को डायबिटीज़ (Diabetes Mellitus) हो जाती है। इसके दो प्रमुख प्रकार हैं:
1. टाइप-1 डायबिटीज़
यह आमतौर पर बचपन या किशोरावस्था में होती है।
इसमें शरीर बिल्कुल भी इंसुलिन नहीं बनाता।
रोगी को हर दिन इंसुलिन इंजेक्शन की ज़रूरत होती है।
2. टाइप-2 डायबिटीज़
यह आमतौर पर वयस्कों में होती है।
इसमें शरीर या तो कम इंसुलिन बनाता है या उसकी संवेदनशीलता (Insulin Resistance) कम हो जाती है।
इसे खानपान, व्यायाम और दवाइयों से कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, पर कई मामलों में इंसुलिन थैरेपी जरूरी हो जाती है।
🩸 इंसुलिन क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
कार्य विवरण
✅ शुगर को ऊर्जा में बदलना इंसुलिन ग्लूकोज़ को कोशिकाओं तक पहुंचाता है
✅ रक्त में शुगर लेवल को संतुलित रखना अधिक या कम शुगर – दोनों ही जानलेवा हो सकते हैं
✅ फैट और प्रोटीन मेटाबोलिज्म इंसुलिन शरीर की चर्बी और प्रोटीन के पाचन में भी भूमिका निभाता है
✅ कोशिका मरम्मत और विकास इंसुलिन सेल ग्रोथ और रिपेयर में भी अहम
💉 इंसुलिन थेरेपी क्या है?
जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता, तो डॉक्टर इंसुलिन इंजेक्शन या पंप के रूप में इंसुलिन थैरेपी देते हैं।
इंसुलिन के प्रकार:
प्रकार कार्य
Rapid-acting खाना खाते ही असर करता है
Short-acting 30 मिनट में असर शुरू करता है
Intermediate-acting 12-18 घंटे तक असर करता है
Long-acting 24 घंटे या उससे अधिक तक असर करता है
इंसुलिन कैसे दिया जाता है?
इंजेक्शन (सिरिंज या पेन)
इंसुलिन पंप (बॉडी से जुड़े रहते हैं)
भविष्य में – नेज़ल स्प्रे या ओरल इंसुलिन पर रिसर्च जारी
⚠️ इंसुलिन थैरेपी से जुड़ी गलतफहमियाँ
❌ मिथक: इंसुलिन एक बार शुरू कर दिया, तो ज़िंदगी भर लेना पड़ेगा
✅ सच्चाई: यह व्यक्ति की हालत और बीमारी के प्रकार पर निर्भर करता है। कई मामलों में इंसुलिन अस्थायी रूप से दी जाती है।
❌ मिथक: इंसुलिन से वजन बढ़ता है
✅ सच्चाई: सही डोज़ और जीवनशैली के साथ वजन नियंत्रित किया जा सकता है।
❌ मिथक: इंसुलिन एक “आखिरी उपाय” है
✅ सच्चाई: कई बार शुरुआत में ही इंसुलिन देना जरूरी होता है ताकि अंगों को नुकसान से बचाया जा सके।
🍽️ इंसुलिन और खानपान का संबंध
इंसुलिन के साथ सही आहार बहुत जरूरी है। डायबिटिक व्यक्ति को:
कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड जैसे ओट्स, ब्राउन राइस, हरी सब्ज़ियाँ खाना चाहिए
मीठे, तले हुए और प्रोसेस्ड फूड से बचना चाहिए
खाने का समय नियमित होना चाहिए ताकि इंसुलिन और शुगर लेवल में तालमेल बना रहे
🏃 इंसुलिन और व्यायाम
नियमित व्यायाम इंसुलिन की कार्यक्षमता (Insulin Sensitivity) बढ़ाता है, जिससे शरीर कम इंसुलिन में भी बेहतर काम कर पाता है।
30 मिनट का brisk walk या योग, ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में बहुत मददगार है।
🔍 इंसुलिन का भविष्य – नई तकनीकें
स्मार्ट इंसुलिन – जो सिर्फ ज़रूरत होने पर ही एक्टिव होती है
इंसुलिन पैनक्रिया ट्रांसप्लांट
जीन थेरेपी और आर्टिफिशियल पैनक्रियाज़
📣 निष्कर्ष:
❝ इंसुलिन सिर्फ डायबिटीज़ के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण शरीर के मेटाबॉलिज़्म के लिए अनिवार्य है ❞
इसलिए, अगर डॉक्टर इंसुलिन लेने की सलाह दें:
डरें नहीं
शर्माएं नहीं
और खुद को दोषी न समझें
यह आपके जीवन की रक्षा करता है – ठीक वैसे ही जैसे हवा और पानी। View Less
HeartAttack हर साल लाखों लोग अचानक हुए दिल के दौरे (Heart Attack) के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। कई बार लोग इस समस्या के लक्षणों को समय पर पहचान नहीं पाते या उन्हें मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि हकीकत यह है कि दिल के दौरे से पहले शरीर हमें संकेत देता है, जिन्हें अगर समय पर समझ लिया जाए, तो इलाज और बचाव संभव है।
यह रिपोर्ट आपको बताएगी कि हार्ट अटैक के मुख्य लक्षण क्या होते हैं, कैसे पुरुषों और महिलाओं में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, और कब आपको डॉक्टर के पास तुरंत जाना चाहिए।
❤️ हार्ट अटैक क्या है?
दिल का दौरा तब होता है जब हृदय को ऑक्सीजन और पोषण देने वाली धमनी (कोरोनरी आर्टरी) किसी ब्लॉकेज या रुकावट के कारण बाधित हो जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचता है।
कारण:
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HeartAttack हर साल लाखों लोग अचानक हुए दिल के दौरे (Heart Attack) के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। कई बार लोग इस समस्या के लक्षणों को समय पर पहचान नहीं पाते या उन्हें मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि हकीकत यह है कि दिल के दौरे से पहले शरीर हमें संकेत देता है, जिन्हें अगर समय पर समझ लिया जाए, तो इलाज और बचाव संभव है।
यह रिपोर्ट आपको बताएगी कि हार्ट अटैक के मुख्य लक्षण क्या होते हैं, कैसे पुरुषों और महिलाओं में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, और कब आपको डॉक्टर के पास तुरंत जाना चाहिए।
❤️ हार्ट अटैक क्या है?
दिल का दौरा तब होता है जब हृदय को ऑक्सीजन और पोषण देने वाली धमनी (कोरोनरी आर्टरी) किसी ब्लॉकेज या रुकावट के कारण बाधित हो जाती है। इससे हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचता है।
कारण:
कोरोनरी धमनी में कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाना
धमनियों में ब्लड क्लॉट
उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान, तनाव, आदि
🚨 प्रमुख लक्षण जो नजरअंदाज नहीं करने चाहिए:
1. सीने में दबाव या दर्द (Chest Pain / Discomfort)
यह सबसे सामान्य लक्षण होता है।
व्यक्ति को ऐसा महसूस हो सकता है जैसे सीने पर कोई भारी बोझ रख दिया गया हो या जलन हो रही हो।
दर्द कई बार बाएं कंधे, बांह, जबड़े या पीठ तक फैल सकता है।
⚠️ नोट: यह दर्द लगातार 5 मिनट से ज्यादा भी रह सकता है या रुक-रुक कर हो सकता है।
2. सांस लेने में तकलीफ (Shortness of Breath)
हल्की गतिविधि पर भी सांस फूलना
चढ़ाई या सीढ़ियाँ चढ़ते वक्त सांस उखड़ना
सोते समय सांस लेने में कठिनाई
यह लक्षण खासकर महिलाओं और बुजुर्गों में अधिक देखने को मिलता है।
3. पसीना आना (Cold Sweat)
बिना किसी गर्मी या मेहनत के पसीना आना
ठंडी या चिपचिपी त्वचा होना
घबराहट के साथ पसीना निकलना
यह लक्षण भी अकसर अनदेखा किया जाता है, लेकिन यह हार्ट अटैक का चेतावनी संकेत हो सकता है।
4. मतली और चक्कर आना (Nausea and Dizziness)
अचानक उल्टी जैसा मन होना
सिर घूमना या बेहोशी जैसा महसूस होना
चलने या खड़े रहने में असहजता
यह लक्षण महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक देखे जाते हैं।
5. थकान और कमजोरी (Extreme Fatigue)
रोज़मर्रा के काम करते हुए भी अत्यधिक थकान महसूस होना
बिना कारण लंबे समय तक शरीर भारी लगना
लगातार सुस्ती बनी रहना
यदि थकान सामान्य से हटकर हो, तो यह दिल की मांसपेशियों की कमजोर हो रही कार्यक्षमता का संकेत हो सकता है।
6. अन्य संकेत जो अनदेखा न करें:
लक्षण विवरण
जबड़े में दर्द विशेषकर बाईं ओर
बांह या कंधे में खिंचाव खासकर बाएं हाथ में दर्द फैलता है
गर्भवती महिलाओं में पेट दर्द या अपच जैसा अहसास यह भी एक छुपा लक्षण हो सकता है
नींद में खलल रात में बार-बार जागना, बेचैनी महसूस होना
👩⚕️ महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अलग क्यों होते हैं?
महिलाओं में लक्षण कम स्पष्ट हो सकते हैं। अकसर वे सीने के दर्द की शिकायत नहीं करतीं, लेकिन निम्नलिखित लक्षण महसूस करती हैं:
अत्यधिक थकान
मतली या उल्टी
शरीर में अकड़न या दर्द
चिंता और घबराहट
इसलिए महिलाएं अगर ऐसे लक्षण महसूस करें, तो इसे “सिर्फ कमजोरी” समझकर टालें नहीं।
📞 कब डॉक्टर के पास जाएं?
यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो और वह 5 मिनट से अधिक बना रहे:
तुरंत एम्बुलेंस (108) बुलाएं
व्यक्ति को आरामदायक स्थिति में बिठाएं
कसावट वाले कपड़े ढीले करें
अगर व्यक्ति होश में है और एलर्जी नहीं है, तो एक एस्पिरिन चबाने के लिए दें (डॉक्टर से पूछकर)
🩺 प्राथमिक जांच और पहचान
हार्ट अटैक की पुष्टि के लिए डॉक्टर निम्नलिखित जांच कर सकते हैं:
ईसीजी (ECG): दिल की धड़कन की इलेक्ट्रिकल गतिविधि जांचता है
ब्लड टेस्ट (Troponin Test): हृदय में क्षति के संकेत देता है
ईकोकार्डियोग्राफी: हृदय की पंपिंग क्षमता का मूल्यांकन
एंजियोग्राफी: ब्लॉकेज की स्थिति जानने के लिए
🔒 कैसे बचें दिल के दौरे से?
✅ जीवनशैली में बदलाव करें:
रोज़ाना 30 मिनट तेज़ चलना या व्यायाम करें
धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएँ
वसा और नमक कम करें
फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज और हेल्दी फैट खाएं
तनाव कम करें – मेडिटेशन या योग का सहारा लें
नियमित जांच कराते रहें – ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल
📌 40 की उम्र के बाद खास ध्यान दें:
परिवार में किसी को दिल की बीमारी हो तो और सतर्क रहें
शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीजों को लक्षण जल्दी उभर सकते हैं
महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद जोखिम बढ़ जाता है
🧠 कुछ मिथक जो तोड़ना ज़रूरी है:
मिथक सच्चाई
“सीने में दर्द नहीं है, तो हार्ट अटैक नहीं हो सकता” कई बार बिना सीने के दर्द के भी अटैक हो सकता है
“मैं फिट हूं, मुझे अटैक नहीं होगा” अटैक कभी भी, किसी को भी हो सकता है – फिट दिखने वाले भी इससे अछूते नहीं
“जवान उम्र में हार्ट अटैक नहीं होता” अब 30 से 40 की उम्र में भी हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं
📣 निष्कर्ष: सावधानी में ही सुरक्षा है
दिल के दौरे के लक्षणों को समझना और समय पर इलाज कराना जीवन रक्षक साबित हो सकता है। याद रखें –
❝ हर सेकंड कीमती है। लक्षणों को नजरअंदाज मत कीजिए। ❞
समय रहते सतर्कता, सही खानपान, व्यायाम और नियमित जांच से हम न सिर्फ हार्ट अटैक से बच सकते हैं बल्कि जीवन को भी लंबा, स्वस्थ और सुरक्षित बना सकते हैं। View Less
LowBP आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में लोग अक्सर उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) के बारे में बात करते हैं, लेकिन निम्न रक्तचाप (लो बीपी) भी एक गंभीर समस्या बनकर उभर रही है। अचानक बीपी लो होना न केवल व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करता है, बल्कि कभी-कभी यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि बीपी अचानक क्यों गिरता है, इसके लक्षण क्या होते हैं और किस प्रकार हम प्राकृतिक उपायों से इसे नियंत्रित कर सकते हैं।
1. बीपी लो क्या है?
जब रक्तचाप सामान्य से कम हो जाता है, यानी 90/60 mmHg से नीचे चला जाता है, तो उसे लो बीपी कहा जाता है। इसका मतलब है कि हृदय द्वारा पंप किया गया रक्त शरीर के अंगों तक सही मात्रा में नहीं पहुंच पा रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से मस्तिष्क, गुर्दे और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों को ... View More
LowBP आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में लोग अक्सर उच्च रक्तचाप (हाई बीपी) के बारे में बात करते हैं, लेकिन निम्न रक्तचाप (लो बीपी) भी एक गंभीर समस्या बनकर उभर रही है। अचानक बीपी लो होना न केवल व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करता है, बल्कि कभी-कभी यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि बीपी अचानक क्यों गिरता है, इसके लक्षण क्या होते हैं और किस प्रकार हम प्राकृतिक उपायों से इसे नियंत्रित कर सकते हैं।
1. बीपी लो क्या है?
जब रक्तचाप सामान्य से कम हो जाता है, यानी 90/60 mmHg से नीचे चला जाता है, तो उसे लो बीपी कहा जाता है। इसका मतलब है कि हृदय द्वारा पंप किया गया रक्त शरीर के अंगों तक सही मात्रा में नहीं पहुंच पा रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से मस्तिष्क, गुर्दे और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है।
2. अचानक बीपी लो होने के कारण
डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण): शरीर में पानी की कमी से रक्त की मात्रा कम हो जाती है।
भोजन में पोषक तत्वों की कमी: खासकर विटामिन B12 और फोलेट की कमी।
दवाओं का प्रभाव: कुछ दवाएँ जैसे डाइयूरेटिक, हृदय की दवाएँ आदि।
लंबे समय तक खड़ा रहना: खून पैरों में जमा हो जाता है जिससे बीपी गिर सकता है।
इन्फेक्शन या एलर्जी: सेप्सिस या शॉक जैसी स्थिति में भी बीपी गिर सकता है।
तनाव या भावनात्मक आघात: अचानक मानसिक आघात से भी रक्तचाप गिर सकता है।
3. लो बीपी के लक्षण: क्या पहचानें?
अचानक चक्कर आना
धुंधली दृष्टि
थकावट या कमजोरी महसूस होना
मिचली या मतली
त्वचा का ठंडा और पसीने से भीगा होना
तेज़ या अनियमित धड़कन
बेहोशी या मूर्छा
यदि ये लक्षण लगातार बने रहें या बार-बार लौटें, तो यह चेतावनी है कि तत्काल कदम उठाना चाहिए।
4. तुरंत क्या करें: प्राथमिक उपचार
जब किसी व्यक्ति का बीपी अचानक गिर जाए, तो आप निम्न प्राथमिक उपचार आजमा सकते हैं:
व्यक्ति को लेटा दें और पैर ऊपर उठाएं: इससे मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह बढ़ेगा।
नमक और पानी का सेवन कराएं: एक गिलास पानी में थोड़ा नमक डालकर पिलाएं।
मीठा कुछ दें: जैसे कि ग्लूकोज़, शहद या मिठाई।
ताजे फल का रस दें: खासकर अनार या नारियल पानी।
धीरे-धीरे उठाएं: बीपी गिरने के बाद अचानक उठना और चलना खतरनाक हो सकता है।
5. प्राकृतिक और घरेलू उपाय: आयुर्वेद की शक्ति
1. तुलसी के पत्ते:
रोज़ सुबह 5-6 तुलसी के पत्ते चबाने से रक्तचाप संतुलित रहता है। तुलसी में पोटेशियम, मैग्नीशियम और विटामिन C होते हैं।
2. अदरक और शहद:
एक चम्मच अदरक का रस और शहद मिलाकर लेने से रक्त संचार सुधरता है। यह हृदय की गति को नियंत्रित करता है।
3. नमक-नींबू पानी:
एक गिलास गुनगुने पानी में चुटकी भर नमक और आधा नींबू मिलाकर पीने से BP जल्दी सामान्य हो सकता है।
4. अनार का रस:
अनार में आयरन की मात्रा अधिक होती है, जो शरीर में ऑक्सीजन के संचार को बेहतर बनाता है।
5. गिलोय का सेवन:
गिलोय रक्तसंचार को नियंत्रित करता है और शरीर को ताकत देता है। यह इम्युनिटी भी बढ़ाता है।
6. खानपान में बदलाव: लो बीपी को कहें बाय-बाय
छोटे-छोटे भोजन लें: दिनभर में कई बार हल्का भोजन करने से BP स्थिर रहता है।
नमक की मात्रा बढ़ाएं: लेकिन उच्च रक्तचाप न होने पर ही।
आयरन और विटामिन युक्त आहार: पालक, बीट, अनार, किशमिश, दूध आदि।
कैफीन युक्त पेय: जैसे चाय या कॉफी कभी-कभार बीपी बढ़ाने में सहायक होते हैं।
7. जीवनशैली में सुधार
योग और प्राणायाम: विशेष रूप से अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका जैसे प्राणायाम रक्तचाप को नियंत्रित रखते हैं।
पर्याप्त नींद: 7-8 घंटे की नींद आवश्यक है।
तनाव कम करें: ध्यान और मेडिटेशन का सहारा लें।
अत्यधिक गर्मी या थकान से बचें: शरीर में पानी की कमी और थकावट से बीपी गिर सकता है।
8. कब चिकित्सक से संपर्क करें?
बार-बार चक्कर आना या मूर्छा आना
लंबे समय तक बीपी 90/60 से कम रहना
कोई अन्य बीमारी के साथ लो बीपी होना (जैसे डायबिटीज, हृदय रोग)
अचानक बेहोशी या सांस लेने में तकलीफ
इन स्थितियों में डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य है। कभी-कभी बीपी गिरना किसी गंभीर रोग का संकेत हो सकता है।
निष्कर्ष: सजगता ही सुरक्षा है
अचानक बीपी लो होना शरीर का एक संकेत है कि कुछ ठीक नहीं है। समय रहते इस पर ध्यान देकर, आयुर्वेद और घरेलू उपायों को अपनाकर और जीवनशैली में थोड़ा बदलाव लाकर हम इस समस्या को काबू में रख सकते हैं। साथ ही, सतर्कता और प्राथमिक उपचार की जानकारी जीवन रक्षक भी साबित हो सकती है। याद रखें, बीपी चाहे लो हो या हाई, संतुलन ही स्वास्थ्य की कुंजी है। View Less
IIT इंदौर और ICMR के साझा अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी।
IIT इंदौर द्वारा किए गए इस रिसर्च में 3,100 से ज़्यादा कोविड-19 मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया — खासतौर पर पहली और दूसरी लहर के दौरान संक्रमित लोगों का।
इसमें पाया गया कि डेल्टा वैरिएंट ने शरीर के बायोकेमिकल संतुलन पर सबसे गंभीर असर डाला, जिससे कैटेकोलामीन (Catecholamine) और थायरॉइड हार्मोन में असंतुलन देखने को मिला।
क्या पाया गया?
इंफ्लेमेशन मार्कर्स (CRP, फेरिटिन) बढ़े हुए पाए गए
ब्लड क्लॉटिंग में तेजी (D-dimer का स्तर अधिक)
किडनी फंक्शन पर असर (यूरिया, क्रिएटिनिन में बदलाव)
ब्लड सेल काउंट्स में असामान्यता
हार्मोनल बदलाव से साइलेंट हार्ट फेल्योर और थायरॉइड से जुड़ी समस्या ... View More
IIT इंदौर और ICMR के साझा अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी।
IIT इंदौर द्वारा किए गए इस रिसर्च में 3,100 से ज़्यादा कोविड-19 मरीजों के डेटा का विश्लेषण किया गया — खासतौर पर पहली और दूसरी लहर के दौरान संक्रमित लोगों का।
इसमें पाया गया कि डेल्टा वैरिएंट ने शरीर के बायोकेमिकल संतुलन पर सबसे गंभीर असर डाला, जिससे कैटेकोलामीन (Catecholamine) और थायरॉइड हार्मोन में असंतुलन देखने को मिला।
क्या पाया गया?
इंफ्लेमेशन मार्कर्स (CRP, फेरिटिन) बढ़े हुए पाए गए
ब्लड क्लॉटिंग में तेजी (D-dimer का स्तर अधिक)
किडनी फंक्शन पर असर (यूरिया, क्रिएटिनिन में बदलाव)
ब्लड सेल काउंट्स में असामान्यता
हार्मोनल बदलाव से साइलेंट हार्ट फेल्योर और थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं की संभावना जताई गई
इस रिसर्च में मशीन लर्निंग का उपयोग कर कुछ ऐसे संकेत पहचाने गए जो आगे चलकर हार्ट और थायरॉइड हेल्थ को प्रभावित कर सकते हैं।
ध्यान रखें:
यह एक रिसर्च स्टडी है, न कि व्यक्तिगत डायग्नोसिस। हर व्यक्ति पर इसके प्रभाव अलग हो सकते हैं। अगर आपको कोविड के बाद थकान, सीने में हल्का दर्द या हार्मोनल असंतुलन जैसे लक्षण महसूस हों, तो विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें। View Less
29 मई से 2 जून तक सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक कोई भी व्यक्ति बाहर (खुले आसमान के नीचे) नही निकलेगा क्योंकि मौसम विभाग ने यह बताया है कि तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से 55 डिग्री सेल्सियस तक जायेगा,` जिससे अगर किसी भी व्यक्ति को घुटन महसूस हो या अचानक तबियत खराब हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं रूम के अंदर दरवाजा खोल कर रखे ताकि विंटीलेशन ना रहे,मोबाइल का प्रयोग कम करे, मोबाइल फटने की संभावना जताई जा रही है,कृपया सावधान रहें और लोगो को सूचित करें,दही , मट्ठा, बेल का जूस आदि ठंडे पेय पदार्थ का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें।
अत्यधिक महत्वपूर्ण सूचना
नागरिक सुरक्षा महानिदेशालय नागरिकों और निवासियों को निम्नलिखित के प्रति सचेत करता है।
आने वाले दिनों में 47 से 55 डिग्री सेल्सियस के बीच बढ़ते तापमान और क ... View More
29 मई से 2 जून तक सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक कोई भी व्यक्ति बाहर (खुले आसमान के नीचे) नही निकलेगा क्योंकि मौसम विभाग ने यह बताया है कि तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से 55 डिग्री सेल्सियस तक जायेगा,` जिससे अगर किसी भी व्यक्ति को घुटन महसूस हो या अचानक तबियत खराब हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं रूम के अंदर दरवाजा खोल कर रखे ताकि विंटीलेशन ना रहे,मोबाइल का प्रयोग कम करे, मोबाइल फटने की संभावना जताई जा रही है,कृपया सावधान रहें और लोगो को सूचित करें,दही , मट्ठा, बेल का जूस आदि ठंडे पेय पदार्थ का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें।
अत्यधिक महत्वपूर्ण सूचना
नागरिक सुरक्षा महानिदेशालय नागरिकों और निवासियों को निम्नलिखित के प्रति सचेत करता है।
आने वाले दिनों में 47 से 55 डिग्री सेल्सियस के बीच बढ़ते तापमान और क्यूम्यलस बादलों की उपस्थिति के कारण अधिकांश क्षेत्रों में दमघोंटू माहौल होने के कारण, यहां कुछ चेतावनियां और सावधानियां दी गई हैं।
कारों में से इन्हें हटा दिया जाना चाहिए
1.गैस सामग्री 2 लाइटर 3. कार्बोनेटेड पेय पदार्थ 4. सामान्यतः इत्र और उपकरण बैटरियाँ 5. कार की खिड़कियाँ थोड़ी खुली (वेंटिलेशन) होनी चाहिए 6. कार के फ्यूल टैंक को पूरा न भरें 7.शाम के समय कार में ईंधन भरें 8.सुबह के समय कार से यात्रा करने से बचें 9. कार के टायरों को ज़्यादा न भरें, ख़ासकर यात्रा के दौरान।
बिच्छुओं और सांपों से सावधान रहें क्योंकि वे अपने बिलों से बाहर निकलेंगे और ठंडी जगहों की तलाश में पार्क और घरों में प्रवेश कर सकते हैं।
खूब पानी और तरल पदार्थ पियें,सुनिश्चित करें कि गैस सिलेंडर को धूप में न रखें, सुनिश्चित करें कि बिजली मीटरों पर अधिक भार न डालें और एयर कंडीशनर का उपयोग केवल घर के व्यस्त क्षेत्रों में करें, विशेषकर अत्यधिक गर्मी के समय में। और दो तीन घंटे के बाद 30 मनिट्स का रेस्ट ज़रूर दे। बाहर 45-47° घर पे AC 24-25° पर ही चेलाएँ,सेहत और तबियत ठीक रहेगी सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में आने से बचें, खासकर सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच।
अंत में: कृपया इस जानकारी को साझा करें क्योंकि अन्य लोग नहीं जानते होंगे और हो सकता है कि वे इसे पहली बार पढ़ रहे हों। View Less
लिपिड प्रोफाइल को बहुत ही अनोखे तरीके से समझाने वाली एक खूबसूरत कहानी
कल्पना कीजिए कि हमारा शरीर एक छोटा-सा कस्बा है। इस कस्बे में सबसे बड़े उपद्रवी हैं - कोलेस्ट्रॉल।
इनके कुछ साथी भी हैं। इनका मुख्य अपराध में भागीदार है - ट्राइग्लिसराइड।
इनका काम है - गलियों में घूमते रहना, अफरा-तफरी मचाना और रास्तों को ब्लॉक करना।
दिल इस कस्बे का सिटी सेंटर है। सारी सड़कें दिल की ओर जाती हैं।
जब ये उपद्रवी बढ़ने लगते हैं, तो आप समझ ही सकते हैं क्या होता है। ये दिल के काम में रुकावट डालने की कोशिश करते हैं।
लेकिन हमारे शरीर-कस्बे के पास एक पुलिस बल भी है।
HDL है वो अच्छा पुलिसवाला, जो इन उपद्रवियों को पकड़कर जेल (लिवर) में डाल देता है।
फिर लिवर इनको शरीर से बाहर निकाल देता है – हमारे ड्र ... View More
लिपिड प्रोफाइल को बहुत ही अनोखे तरीके से समझाने वाली एक खूबसूरत कहानी
कल्पना कीजिए कि हमारा शरीर एक छोटा-सा कस्बा है। इस कस्बे में सबसे बड़े उपद्रवी हैं - कोलेस्ट्रॉल।
इनके कुछ साथी भी हैं। इनका मुख्य अपराध में भागीदार है - ट्राइग्लिसराइड।
इनका काम है - गलियों में घूमते रहना, अफरा-तफरी मचाना और रास्तों को ब्लॉक करना।
दिल इस कस्बे का सिटी सेंटर है। सारी सड़कें दिल की ओर जाती हैं।
जब ये उपद्रवी बढ़ने लगते हैं, तो आप समझ ही सकते हैं क्या होता है। ये दिल के काम में रुकावट डालने की कोशिश करते हैं।
लेकिन हमारे शरीर-कस्बे के पास एक पुलिस बल भी है।
HDL है वो अच्छा पुलिसवाला, जो इन उपद्रवियों को पकड़कर जेल (लिवर) में डाल देता है।
फिर लिवर इनको शरीर से बाहर निकाल देता है – हमारे ड्रेनेज सिस्टम के ज़रिए।
लेकिन एक बुरा पुलिसवाला भी है - LDL, जो सत्ता का भूखा है।
LDL इन उपद्रवियों को जेल से छोड़कर फिर से सड़कों पर छोड़ देता है।
जब अच्छा पुलिसवाला HDL कम हो जाता है, तो पूरा कस्बा अस्त-व्यस्त हो जाता है।
ऐसे कस्बे में कौन रहना चाहेगा?
क्या आप इन उपद्रवियों को कम करना और अच्छे पुलिसवालों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं?
चलना शुरू कीजिए!
हर कदम के साथ HDL बढ़ेगा, और कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड और LDL जैसे उपद्रवी कम होंगे।
आपका शरीर (कस्बा) फिर से जीवंत हो उठेगा।
आपका दिल – सिटी सेंटर – उपद्रवियों की ब्लॉकेज (हार्ट ब्लॉक) से सुरक्षित रहेगा।
और जब दिल स्वस्थ होगा, आप भी स्वस्थ रहेंगे।
इसलिए, जब भी मौका मिले – चलना शुरू कीजिए!
स्वस्थ रहें... और
अच्छे स्वास्थ्य की कामना
हर कदम HDL को बढ़ाता है।
इसलिए – चलो, चलो और चलते रहो।
हैप्पी सीनियर सिटिज़न्स वीक
कम करें:
1. नमक
2. चीनी
3. ब्लीच किया हुआ मैदा
4. डेयरी उत्पाद
5. प्रोसेस्ड फूड्स
खाएं:
1. सब्जियां
2. दालें
3. बीन्स
4. मेवे
5. अंडे
6. कोल्ड प्रेस्ड तेल
तीन चीजें जिन्हें भूलने की कोशिश करें:
1. अपनी उम्र
2. अपना अतीत
3. अपनी शिकायतें
चार जरूरी चीजें जिन्हें अपनाएं:
1. अपना परिवार
2. अपने दोस्त
3. सकारात्मक सोच
4. स्वच्छ और स्वागतभरा घर
तीन मूलभूत बातें जिन्हें अपनाना चाहिए:
1. हमेशा मुस्कराएं
2. अपनी गति से नियमित शारीरिक गतिविधि करें
3. अपने वजन की जांच और नियंत्रण करें
छह आवश्यक जीवनशैली जो आपको अपनानी चाहिए:
1. पानी पीने के लिए तब तक प्रतीक्षा न करें जब तक आप प्यासे न हों।
2. आराम करने के लिए तब तक प्रतीक्षा न करें जब तक आप थके नहीं।
3. चिकित्सा परीक्षणों के लिए तब तक प्रतीक्षा न करें जब तक आप बीमार न हों।
4. चमत्कारों की प्रतीक्षा न करें, भगवान पर भरोसा रखें।
5. कभी भी अपने आप पर से विश्वास न खोएं।
6. सकारात्मक रहें और हमेशा एक बेहतर कल की आशा रखें।
यदि आपके मित्र हैं इस आयु सीमा में (47-90 वर्ष), कृपया उन्हें यह भेजें। View Less
मशहूर गजल गायक पंकज उधास की मौत को लेकर कहा जा रहा है कि उनकी मौत पैंक्रियाटिक कैंसर की वजह से हुई है. पैंक्रियाटिक कैंसर में पैंक्रियाज ग्लैंड की कोशिकाएं अनियमित रूप से बढ़ने लगती हैं. अधिक शराब पीना, धूम्रपान करना, मोटापा पैंक्रियाटिक कैंसर का खतरा बढ़ा देते हैं.
क्या है पैंक्रियाटिक कैंसर ?
पैंक्रियाटिक कैंसर पैंक्रियाज में होने वाला कैंसर है. पैंक्रियाज पेट के पीछे, छोटी आंत के पास स्थित एक लंबा ग्लैंड होता है जिसका काम एक्सोक्राइन फंक्शन यानी पाचन में मदद करना होता है. यह ग्लैंड एंडोक्राइन को नियंत्रित भी करता है. एंडोक्राइन ब्लड शुगर लेवल को सामान्य रखने का काम करता है. जब किसी इंसान को पैंक्रियाटिक कैंसर होता है तो उसके पैंक्रियाज में सूजन आने लगती है.पैंक्रियाटिक कैंसर सबसे खतरनाक कैंसरों में से एक है जो हर साल 4 लाख ... View More
मशहूर गजल गायक पंकज उधास की मौत को लेकर कहा जा रहा है कि उनकी मौत पैंक्रियाटिक कैंसर की वजह से हुई है. पैंक्रियाटिक कैंसर में पैंक्रियाज ग्लैंड की कोशिकाएं अनियमित रूप से बढ़ने लगती हैं. अधिक शराब पीना, धूम्रपान करना, मोटापा पैंक्रियाटिक कैंसर का खतरा बढ़ा देते हैं.
क्या है पैंक्रियाटिक कैंसर ?
पैंक्रियाटिक कैंसर पैंक्रियाज में होने वाला कैंसर है. पैंक्रियाज पेट के पीछे, छोटी आंत के पास स्थित एक लंबा ग्लैंड होता है जिसका काम एक्सोक्राइन फंक्शन यानी पाचन में मदद करना होता है. यह ग्लैंड एंडोक्राइन को नियंत्रित भी करता है. एंडोक्राइन ब्लड शुगर लेवल को सामान्य रखने का काम करता है. जब किसी इंसान को पैंक्रियाटिक कैंसर होता है तो उसके पैंक्रियाज में सूजन आने लगती है.पैंक्रियाटिक कैंसर सबसे खतरनाक कैंसरों में से एक है जो हर साल 4 लाख भारतीयों को प्रभावित कर रहा है. यह कैंसर तब होता है जब पैंक्रियाज की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि होने लगती है. जब तक इंसान एडवांस स्टेज में न पहुंच जाए, पैंक्रियाटिक कैंसर के कोई लक्षण नजर नहीं आते. इस कारण से पैंक्रियाज कैंसर का पता लगाना और उसका इलाज करना बहुत कठिन होता है.'
पैंक्रियाटिक कैंसर के लक्षण ?
पैंक्रियाटिक कैंसर जब अपने एडवांस स्टेज में पहुंचता है तो इंसान में ये लक्षण नजर आते हैं-
-पेट में दर्द जो कि धीरे-धीरे पीठ दर्द में बदल जाता है
-भूख कम लगना
-वजन कम होना -त्वचा और आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ जाना जिसे जॉन्डिस कहा जाता है
-स्टूल के रंग में बदलाव गहरे रंग का पेशाब
-खुजली
-डायबिटीज होना या फिर डायबिटीज को कंट्रोल कर पाना मुश्किल हो जाना
-पैरों और बांहों में दर्द और सूजन जो कि खून के जमने से हो सकता है.
-थकान और कमजोरी महसूस होना
पैंक्रियाटिक कैंसर से बचाव कैसे करें ?
स्मोकिंग बिल्कुल कम करें या छोड़ दें. शराब का अधिक सेवन पैंक्रियाटिक कैंसर का खतरा बढ़ाता है इसलिए इसका सेवन बिल्कुल कम करें और धीरे-धीरे शराब छोड़ देपैंक्रियाज कैंसर का खतरा कम करने के लिए वजन नियंत्रण में रखें. नियमित रूप से एक्सरसाइज और योग करें, संतुलित खाना खाएं. रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड और तली-भुनी चीजों से दूरी बनाएं. इसके बजाए ताजे फल- सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन का सेवन करें. View Less
ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) एक मौसमी वायरस है, जो मुख्य रूप से सर्दियों में फैलता है। यह हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम (श्वसन तंत्र) को प्रभावित करता है और इसके लक्षण सर्दी-जुकाम जैसे होते हैं। इस वायरस की पहचान सबसे पहले 2001 में हुई थी, लेकिन हाल के दिनों में यह चीन में तेजी से फैल रहा है और अब भारत में भी इसके मामले सामने आने लगे हैं।
HMPV वायरस से सबसे ज्यादा खतरा किन्हें?
यह वायरस खासकर उन लोगों को अधिक प्रभावित करता है जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
छोटे बच्चे: इनका इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता।
बुजुर्ग: उम्र बढ़ने के साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
अस्थमा मरीज: यह वायरस सीधे श्वसन तंत्र पर अटैक करता है।
क्रॉनिक बीमारियों से ग्रस्त लोग: जैसे डायबिटीज या हार्ट ... View More
ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) एक मौसमी वायरस है, जो मुख्य रूप से सर्दियों में फैलता है। यह हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम (श्वसन तंत्र) को प्रभावित करता है और इसके लक्षण सर्दी-जुकाम जैसे होते हैं। इस वायरस की पहचान सबसे पहले 2001 में हुई थी, लेकिन हाल के दिनों में यह चीन में तेजी से फैल रहा है और अब भारत में भी इसके मामले सामने आने लगे हैं।
HMPV वायरस से सबसे ज्यादा खतरा किन्हें?
यह वायरस खासकर उन लोगों को अधिक प्रभावित करता है जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
छोटे बच्चे: इनका इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता।
बुजुर्ग: उम्र बढ़ने के साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।
अस्थमा मरीज: यह वायरस सीधे श्वसन तंत्र पर अटैक करता है।
क्रॉनिक बीमारियों से ग्रस्त लोग: जैसे डायबिटीज या हार्ट की समस्या।
HMPV वायरस के लक्षण:-
लगातार खांसी और बुखार
सांस लेने में दिक्कत
गले में खराश और नाक बंद होना
थकान और कमजोरी
गंभीर मामलों में ब्रॉन्काइटिस या निमोनिया
HMPV वायरस से बचाव के तरीके:-
सफाई का ध्यान रखें: अपने हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोएं।
मास्क का इस्तेमाल करें: खासकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में।
सोशल डिस्टेंसिंग: संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें।
इम्यूनिटी बढ़ाएं: विटामिन-सी युक्त फलों, हरी सब्जियों और पर्याप्त नींद पर ध्यान दें।
संक्रमित वस्तुओं से बचाव: दूषित वस्तुओं को छूने से बचें या छूने के बाद हाथ धोएं।
HMPV वायरस कोरोना की तरह खतरनाक नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। यह वायरस बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा जोखिमपूर्ण है। सही जानकारी और सावधानी से इस वायरस के प्रभाव को रोका जा सकता है। इसलिए, खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टर की सलाह लें और बचाव के उपाय अपनाएं। View Less
गुर्दे की पथरी, जिसे नेफ्रोलिथियासिस भी कहा जाता है, खनिजों और लवणों से बनी होती है जो मुख्य रूप से गुर्दे में बनते हैं। यह समस्या कई कारणों से हो सकती है और अगर यह लंबे समय तक लाइलाज बनी रहे तो यह मूत्र मार्ग के उस हिस्से को प्रभावित कर सकती है जो किडनी से लेकर मूत्राशय तक जाता है।
किडनी स्टोन कितने प्रकार के होते हैं? (What are the types of kidney stones in Hindi)
कैल्शियम स्टोन: ज्यादातर किडनी स्टोन कैल्शियम स्टोन होते हैं, जो आमतौर पर कैल्शियम ऑक्सालेट के रूप में होते हैं। ऑक्सालेट एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पदार्थ है जो भोजन में पाया जाता है और प्रतिदिन लीवर द्वारा निर्मित होता है। कुछ फलों और सब्जियों के साथ-साथ नट्स और चॉकलेट में भी उच्च मात्रा में ऑक्सालेट होता है।
डिस्चार्ज स्टोन: स्ट्रुवाइट स्टोन ए ... View More
गुर्दे की पथरी, जिसे नेफ्रोलिथियासिस भी कहा जाता है, खनिजों और लवणों से बनी होती है जो मुख्य रूप से गुर्दे में बनते हैं। यह समस्या कई कारणों से हो सकती है और अगर यह लंबे समय तक लाइलाज बनी रहे तो यह मूत्र मार्ग के उस हिस्से को प्रभावित कर सकती है जो किडनी से लेकर मूत्राशय तक जाता है।
किडनी स्टोन कितने प्रकार के होते हैं? (What are the types of kidney stones in Hindi)
कैल्शियम स्टोन: ज्यादातर किडनी स्टोन कैल्शियम स्टोन होते हैं, जो आमतौर पर कैल्शियम ऑक्सालेट के रूप में होते हैं। ऑक्सालेट एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पदार्थ है जो भोजन में पाया जाता है और प्रतिदिन लीवर द्वारा निर्मित होता है। कुछ फलों और सब्जियों के साथ-साथ नट्स और चॉकलेट में भी उच्च मात्रा में ऑक्सालेट होता है।
डिस्चार्ज स्टोन: स्ट्रुवाइट स्टोन एक संक्रमण के कारण होते हैं, मुख्य रूप से मूत्र पथ में। ये पत्थर तेजी से बढ़ सकते हैं और काफी बड़े हो सकते हैं।
यूरिक एसिड स्टोन: ये पथरी उन लोगों में अधिक होती है जो पर्याप्त तरल पदार्थ का सेवन नहीं करते हैं या जो उच्च प्रोटीन आहार खाते हैं। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यूरिक एसिड स्टोन अधिक आम हैं, जिनके मूत्र में अधिक एसिड होता है।
सिस्टीन स्टोन: हालांकि, यह एक प्रकार का किडनी स्टोन है, जो बहुत कम लोगों में होता है। यह समस्या मुख्य रूप से उन लोगों में होती है, जिन्हें आनुवंशिक विकार है। सिस्टीन पत्थरों के मामले में, सिस्टीन नामक एक एसिड गुर्दे से मूत्र में रिसता है।
किडनी में स्टोन क्यों होता है? (Why do kidney stones occur in Hindi)
आजकल किडनी में स्टोन होना आम बात हो गई है। पथरी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत उसका इलाज कराना चाहिए। आइए जानते हैं किडनी स्टोन होने के क्या कारण होते हैं।
कम मात्रा में पानी पीना मुख्य कारणों में से एक है,मूत्र में रासायनिक अधिकता , शरीर में खनिजों की कमी , पानी की कमी ,विटामिन डी की अधिकता ,जंक फूड का ज्यादा सेवन
गुर्दे की पथरी के लक्षण क्या है? (What are the symptoms of kidney stones in Hindi)
वैसे तो किडनी में पथरी होने से दर्द होता है, लेकिन इसके साथ और भी कई लक्षण होते हैं:
पेशाब के दौरान दर्द,पीठ के निचले हिस्से, पेट में दर्द और ऐंठन ,पेशाब में खून ,उल्टी, पेशाब करते वक़्त दर्द होना, बार-बार पेशाब जैसा लगना लेकिन पेशाब न आना ,बुखार ,अधिक पसीना आना
गुर्दे की पथरी का इलाज कैसे करें? (How to treat kidney stones in Hindi)
गुर्दे की पथरी का कई तरह से इलाज किया जा सकता है, जिनमें से प्रमुख हैं:
दवाएं समय पर लेना: कभी-कभी दवाएं लेना भी गुर्दे की पथरी के इलाज में मददगार साबित हो सकता है लेकिन यह दवाएं डॉक्टर द्वारा ली जानी चाहिए। ये दवाएं शरीर में पथरी के विकास को रोकती हैं, जिससे इसका बेहतर इलाज हो सके।
थेरेपी: किडनी स्टोन में थेरेपी लेना भी फायदेमंद तरीका साबित हो सकता है क्योंकि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। इसके बावजूद लोगों को इलाज नहीं मिल पाता है क्योंकि उन्हें इसकी पूरी जानकारी नहीं होती है।
सर्जरी: जब स्टोन की बीमारी का किसी भी तरह से इलाज नहीं किया जा सकता है, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते हैं। इस स्थिति में किडनी स्टोन हटाने की सर्जरी सबसे प्रभावी सर्जरी है। इस प्रक्रिया में, गुर्दे की पथरी को शल्य चिकित्सा द्वारा हटा दिया जाता है। View Less
चेस्ट में संक्रमण यानि इन्फेक्शन खतरनाक होता हैं यह इन्फेक्शन होने से फेफड़ो पर भी असर पड़ता हैं। चेस्ट इन्फेक्शन होने का मुख्य कारण बैक्टीरिया, वायरस और फंगी हो सकता हैं। चेस्ट इन्फेक्शन में सबसे ज्यादा दिक्कत सांस लेने में होती हैं तथा अधिक खासी और गले में दर्द भी होता हैं। यह किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी हो जाता हैं।
चेस्ट इन्फेक्शन एक प्रकार का सांस से संबंधित संक्रमण है जिसका प्रभाव श्वसन मार्ग के निचले हिस्से पर पड़ता है।श्वसन मार्ग के निचले हिस्से में श्वास नली, ब्रोंकाई और फेफड़े आते हैं। दो मुख्य प्रकार के चेस्ट इंफेक्शन होते हैं जिनमें निमोनिया और ब्रोंकाइटिस शामिल हैं। हल्के से लेकर गंभीर चेस्ट इंफेक्शन हो सकता है।
चेस्ट इन्फेक्शन के लक्षण क्या होते हैं ?
छाती में इन ... View More
चेस्ट में संक्रमण यानि इन्फेक्शन खतरनाक होता हैं यह इन्फेक्शन होने से फेफड़ो पर भी असर पड़ता हैं। चेस्ट इन्फेक्शन होने का मुख्य कारण बैक्टीरिया, वायरस और फंगी हो सकता हैं। चेस्ट इन्फेक्शन में सबसे ज्यादा दिक्कत सांस लेने में होती हैं तथा अधिक खासी और गले में दर्द भी होता हैं। यह किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी हो जाता हैं।
चेस्ट इन्फेक्शन एक प्रकार का सांस से संबंधित संक्रमण है जिसका प्रभाव श्वसन मार्ग के निचले हिस्से पर पड़ता है।श्वसन मार्ग के निचले हिस्से में श्वास नली, ब्रोंकाई और फेफड़े आते हैं। दो मुख्य प्रकार के चेस्ट इंफेक्शन होते हैं जिनमें निमोनिया और ब्रोंकाइटिस शामिल हैं। हल्के से लेकर गंभीर चेस्ट इंफेक्शन हो सकता है।
चेस्ट इन्फेक्शन के लक्षण क्या होते हैं ?
छाती में इन्फेक्शन का मुख्य कारण खासी होता हैं इस दौरान शरीर में अधिक कमजोरी महसूस होती हैं और साथ ही इनसे अलग नहीं कुछ लक्षण नज़र आ सकते हैं जैसे की –
उलझन ,लो ब्लड प्रेशर ,हृदय की धड़कने तेज होना ,घरघराहट होना ,मतली और उलटी होना
,सांस लेने में कठिनाई होना और सास तेजी से लेना ,छाती में दर्द व तकलीफ ,भूख न लगना
,मांसपेशियों में दर्द ,बलगम का बढ़ना ,जुकाम
,चेस्ट में दर्द ,सांस फूलना।
चेस्ट इन्फेक्शन के कारण क्या हैं ?
बैक्टीरियल या वायरल इन्फेक्शन के कारण चेस्ट इन्फेक्शन हो सकता हैं। चेस्ट इंफेक्शन से ग्रस्त व्यक्ति के खांसने या छींकने पर निकली संक्रमित बूंदों के संपर्क में आने पर आप भी इस संक्रमण से ग्रस्त हो सकते हैं। इसके अलावा वायरस या बैक्टीरिया से संक्रमण जगहों पर जाने के बाद मुंह या चेहरे को छूने पर संक्रमण फैल सकता है। बुजुर्ग व्यक्ति, गर्भवती महिला, शिशु या बच्चों, सिगरेट पीने वालों या किसी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति से ग्रस्त व्यक्ति जैसे कि क्रोनिक ओब्स्ट्रक्टिव पल्ममोनरी डिस्ऑर्डर, अस्थमा या डायबिटीज के मरीजों में चेस्ट इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है।
चेस्ट इन्फेक्शन में क्या-क्या खाना चाहिए ?
चेस्ट इन्फेक्शन के इलाज के समय डॉक्टर कुछ दवाइयों का सेवन करने के लिए कहते हैं जिनके लिए इम्युनिटी का स्ट्रांग होना आवश्यक होता हैं तो उसके लिए जिस प्रकार के पदार्थो का सेवन करना चाहिए जैसे की –
टमाटर का सूप: सूप गले को शांत करने और छाती में जमाव को दूर करने में मददगार हो सकता हैं टमाटर में लाइकोपीन नामक एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होती हैं। लाइकोपीन गले में हुई सूजन को कम कर सकता हैं तथा यह मनुष्य के फेफड़ो को भी स्वस्थ बनाता हैं इसलिए चेस्ट इन्फेक्शन के समय एक कटोरी गर्म टमाटर सूप का सेवन करे ताकि वह गले को शांत रखे और वायु मार्ग को भी साफ रखने में मदद करें।
हल्दी वाला दूध: हल्दी वाला दूध कई बीमारियों के लिए लाभदायक होता हैं हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो की छाती के संक्रमण के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। हल्दी वाला दूध फेफड़ो के लिए भी अधिक अच्छा होता हैं।
दाल का सूप: अगर आप चेस्ट इन्फेक्शन से पीड़ित हैं तो प्रोटीन का सेवन जरूर करना चाहिए छाती में इन्फेक्शन शरीर की एनर्जी लेवल को बहुत कम कर देता हैं। दाल में कई अन्य पोषक तत्व होते हैं जो की फेफड़ो के लिए भी फायदेमंद होते हैं।
कॉफी: कॉफी और अन्य कैफीनयुक्त पेय हमारे एनर्जी लेवल को तुरंत बढ़ा देते हैं। एक गर्म कप कॉफी भी आपके गले को आराम प्रदान कर सकती है. कॉफी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है जो आपको अन्य बैक्टीरिया और वायरस जैसे बाहरी रेडिकल्स से बचाने में मदद करती है। कॉफी ने फेफड़ों के कामकाज के मामले में अस्थमा और फेफड़ों से संबंधित अन्य बीमारियों में भी सुधार दिखाया है।
ग्रीन टी: अन्य कैफीनयुक्त पेय की तरह ग्रीन टी एनर्जी लेवल को बढ़ाने में मदद करती है. इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जो चेस्ट इंफेक्शन से पीड़ित होने पर आपके लक्षणों की गंभीरता को कम करने में मदद कर सकते हैं। आपके लक्षणों को कम करने पर इसके प्रभाव को और बढ़ाने के लिए शहद के साथ इसका सेवन भी किया जा सकता हैं। View Less